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कहानियाँ / गद्य

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  1. आरक्षण

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बेटी हो सूरज की तरह

बेटी हो सूरज की तरह चाँद न बनाओ बेटी को, बनाओ बेटी को सूरज की तरह, बुरी नजर वालों की आंख चौन्ध जाय, फौलाद भर दो सूरज की तरह।। क्यों बनाते हो खिलौनों की तरह, कोमल की हैवान खेल जाता है, ता उम्र दर्द झेलनी पड़ती बेटी को, या मौत गले लगा लेती है, तैयार करो बेटी को इस तरह, अंगार भर दो भठ्ठी की तरह, चाँद न बनाओ बेटी को, बनाओ बेटी को सूरज की तरह।। कब तक रोती रहेगी बेटी, इस पापी संसार में, कब तक सहती रहेगी बेटी, अत्याचार इस सामाज में, अब तो हो उद्धार बेटियों का, काटों संग खिल जाय गुलाब की तरह, चाँद न बनाओ बेटी को, बनाओ बेटी को सूरज की तरह।। बेटी दुर्गा भी है लक्ष्मी भी है, वक्त पड़ने पर बनती काली भी है, देख रूप सरस्वती और सती का, ये दुनिया बेटी पर भारी भी है, वक्त है बनाओ रणचण्डी की तरह, तैयार हो जाय महाकाली की तरह, चाँद न बनाओ बेटी को, बनाओ बेटी को सूरज की तरह , बुरी नजर वालों की आंख चौन्ध जाय, फौलाद भर दो सूरज की तरह।।                  ...

निष्काम कर्म

निष्काम कर्म कर्म प्रधान है ये दुनिया, फल पर किसी का बस नहीं, कर्तव्य समझ हर कर्म करो, इससे बढ़ कर कोई धर्म नहीं। फल की इच्छा त्याग कर, उचित कर्म तू करता जा, फल तुझे अवश्य मिलेगा, प्रभु की ईच्छा समझ कर, बस तू स्वीकार करता जा।  मोह का बंधन त्याग कर, निष्काम कर्म तू करता जा, मोक्ष तुझे अवश्य मिलेगा, प्रभु का नाम बस जपता जा। यही है गुढ़ रहस्य कर्मयोग का, आवागमन से तू मुक्त हो जाएगा, मिलेगा प्रभु की शरण तुझे, लोक कल्याण  तू करता जा।। निष्काम कर्म ही है एक उपाय, जो इस भवसागर से पार कराय, गीता का यही है एक उपदेश, इसी से मोक्ष का द्वार खुल जाय। नागेन्द्र देवांगन

आहिस्ता आहिस्ता

आहिस्ता आहिस्ता कोरोना का कहर छाया आहिस्ता आहिस्ता, देश की स्थिति बिगड़ रही आहिस्ता आहिस्ता । केवल एक ही उपाय है बचने का इससे, सुरक्षित रह सकते हैं घर पर रहकर इससे ।। लगाकर मास्क और धोकर हाथ, बच सकते है इससे आहिस्ता आहिस्ता । अपनाएंगे 2 गज दूरी एक - दूसरे से, बचेंगे सभी कोरोना से आहिस्ता आहिस्ता।। (नागेन्द्र देवांगन)